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Immunity How to Increase for Fighting Against Infections in Pandemic

At present time, we need to be aware about the pandemic (COVID-19) situations around us. Because it has been spreaded at fast pace and can be stopped only by our own willpower to fight against it by doing good habits and safe practices in our daily routine work. In fact, we know that older adults are at higher risk in this situation (#COVID-19) as compared to young adults. So, it is our sole responsibility to help them and care them. Also, we need to aware them about immunity, how to increase it.

For better health care of older people, we must know about geriatrics ?
So do you know,

What is Geriatrics?


• A branch of medicine or science that deals with the health problems, diseases and caring practices of old age people is known as geriatrics.
If anyone is willing to learn about geriatrics, mostly they are unable to find a geriatrician. Isn’t so ?
But it doesn’t mean that we can’t help our older adult people . We can do it by involving ourselves in the care of older adults and learning how to apply some of things what a geriatricians know.
• We all know that, with increase in the age of a person, diseases in the body of older people also increases. Some common diseases or problems in older adults are Immunity weakness , adult onset Diabetes , Arthritis, Kidney and bladder problems , Dementia , Parkinson’s disease, Cataracts, Osteoporosis, Macular degeneration, Cardiovascular diseases etc. These diseases are mostly because of lack of nutrition, physical in-activeness & positive attitude in our today’s lifestyle.

Do we know reasons?

Why older people are at risk?

Its most common factor, is “ WEAK IMMUNITY”.
So, how can we boost up immunity of our self & our older ones. We know that there is no vaccine for curing pandemic COVID-19. Immunity building could prevent us from infectious disease. So, be aware about immunity, how to increase it.

How to build immunity ?

•Eat a healthy diet which must be high in citrus fruits and vegetables.
•Do hard exercise regularly.
•Have a positive attitude.
•Use of organic products: Many products claim to boost or support immunity. But the concept of boosting immunity actually makes a little sense scientifically. In fact, boosting the number of cells in our body (immune cells or others) with the help of chemical products, is not necessarily a good thing . Using organic ways of boosting our #immune system is a good way.

Diet and Immune system ?

• Healthy immune system needs good and regular nourishment. Scientists, have long recognized that people who live in poverty and are malnourished are more prone to infectious diseases. Whether the increased rate of disease is caused by malnutritional effects on the immune system.
• There are some evidences which show that some micronutrients deficiencies — for example, deficiencies of zinc, selenium, iron, copper, folic acid, vitamins A, vitamin B6, vitamin C and vitamin E, are responsible for effecting immune system of our body.

So, what can we do? If we find that our diet is not providing us our daily need of nutrition.

Improve immunity with herbs and supplements ?

Most of us still thinks that taking supplements is not useful. Is it so ?
Walk into a health care store, and you will find bottles of pills and herbal preparations that claim to boost up your immunity. Demonstrating whether a herb or any substance, for that matter — can enhance immunity is, as yet, a highly complicated matter. Scientists don’t know, but choosing good products and healthy products for yourself must be useful in a way.

How Amway- Nutrilite supplements are useful in increasing immunity ?

Nutrilite is the brand that makes organic supplements with a philosophy of best in science, best in nature and best in traditional wisdom.

Following organic nutritional sources & #supplements help in boosting our immunity and make us capable of fighting against infections:

  • Protein (All plant protein)
  • Vitamin C (Natural C)
  • Vitamin A (Multi carotene)
  • Echinacea citrus concentrate plus
  • Vasaka, Mulethi, Surasa
  • Tulsi
  • Galic
  • Ashwagandha

Content published by Ms. Gunjan Nagarkoti (B.Sc. Nursing)


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Amazing Tulsi Benefits in Hindi – तुलसी: प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली जड़ी बूटी

Tulsi herb is widely used around the world due to its powerful health benefits. Its botanical name is Ocimum Sanctum. Tulsi has medicinal benefits and is a powerful antioxidant. So, we are going to elobarate types and amazing tulsi benefits in hindi language.

तुलसी – एंटी ऑक्सीडेंट: #Tulsi in Hindi

तुलसी को “इंडियन बेसिल” के नाम से जाना जाता है और अंग्रेजी में इसे “होली बेसिल” भी कहा जाता है। यह एक संस्कृत नाम है।

भारत में इसको “जड़ी बूटियों की रानी” भी कहा जाता है और देवी लक्ष्मी के रूप में सम्मान भी दिया जाता है। कहें तो समृद्धि की रानी भी कहा जा सकता है। इसलिए तुलसी को “श्री (लक्ष्मी) तुलसी” या “रामा तुलसी” या “विष्णु तुलसी” के नाम से भी जाना जाता है।

तुलसी हर एक भारतीय हिंदू परिवार के घर में उगाई जाती है। जैसा कि हम जानते हैं कि इसे एक पवित्र जड़ी-बूटी माना जाता है तथा स्वास्थ, संपत्ति और समृद्धि की देवी के रूप में भी पूजा जाता है।

दुनिया भर में तुलसी की लगभग 60 प्रजातियां हैं और व्यापक रूप से इन प्रजातियों को दो श्रेणियों में बांटा गया है।

तुलसी के व्यापक प्रकार: #Types of Tulsi

पहला होली बेसिल (ओसिमम् सेन्कटम्)

दूसरा मेडिटेरेनियन बेसिल (ओसीमम् बेसिलिकम)

इंडियन तुलसी के प्रकार: #Types of Indian Tulsi

  • रामा तुलसी” या “श्री तुलसी” (ओसीमम् सेन्कटम्) (हरी पत्तियां): ज्यादातर भारत, चाइना, ब्राजील और पूर्वी नेपाल के इलाकों में यह तुलसी पाई जाती है।
  • कृष्णा तुलसी” या “श्यामा तुलसी” (बैगनी रंग की पत्तियां): यह तुलसी ज्यादातर एशियाई देशों में पाई जाती है और मुख्यतः कहे तो भारत में ज्यादा पाई जाती है।
  • वना तुलसी (जंगली पत्तियां): ज्यादातर एशियाई और अफ्रीकन देशों में पाई जाती है।
  • कपूर तुलसी (वजनदार फूल): ज्यादातर भारत और यूनाइटेड स्टेट्स में पाई जाती है।

आयुर्वेद में, रामा तुलसी और कृष्णा तुलसी का प्रयोग बहुत ही व्यापक रूप से होता है। कृष्णा तुलसी (बैगनी पत्ते वाली तुलसी) स्वांस तंत्र, गले के संक्रमण, नाक के घाव, कान दर्द और त्वचा संबंधी रोगों को ठीक करने में बहुत फायदेमंद होती है।

ऊपर बताए गए तुलसी के चारों प्रकार होली बेसिल श्रेणी के अंतर्गत ही आते हैं।

तुलसी का एरियल(हवाई) अंग ही विशेष रुप से चिकित्सक उपचारों में काम आता है, जैसे काड़ा सूप। इसकी पत्तियां दिखने में हरे या बैगनी रंग की, अंडेकार और नुकीली नोक जैसी होती हैं।

स्वास्थ्य लाभ: #Tulsi Benefits in Hindi

  • इसका प्रमुख लाभ हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाना होता है।
  • यह ऑक्सीकरणरोधी (एंटीऑक्सीडेंट) के रूप में काम करती है। यह हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स के द्वारा की गई क्षति को कम करने में सहायता करती है।
  • तुलसी हमारे शरीर में द्रव्य पदार्थों (बॉडी फ्लूड), हार्मोनल और इंजॉयमैटिक कार्यों का संतुलन बनाए रखने में सहायता करती है।
  • तुलसी एंटीबैक्टीरियल, एंटीबायोटिक, जर्मीसाइडल, फंगीसाइडल और एंटीपायरेटिक (बुखार को रोकना) की तरह भी काम करती है।
  • यह पेनक्रिएटिक बीटा सेल्स के कार्यों को करने में सहायता करती है, जिससे इंसुलिन को नियंत्रित करने में सहयोग मिलता है। इसलिए तुलसी को डायबिटीज रोधक के नाम से भी जानते है।
  • तुलसी दिल से संबंधित बीमारियों से भी हमें बचाती है।
  • तुलसी डाईयूरेटिक (यूरिक एसिड संबंधी) और डिटॉक्सिफायर (विश को कम करने) के रूप में कार्य करती है इसलिए यह शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को घटाने में भी सहायक है।
  • यह एंटीइन्फ्लेमेटरी (सूजन कम करने में) दवा के रूप में सहायक है।
  • तुलसी एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) जड़ी बूटी है।
  • तुलसी हैपेटोप्रोटेक्टिव (लीवर स्वास्थ्य संबंधी) विशेषता के लिए भी जानी जाती है।
  • यह कैंसर कोशिकाओं के स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है।
  • तुलसी रक्त वाहिनी (ब्लड वेसल्स) के देख-रेख में सहायता करती है।
  • यह तनाव रोधक (डीस्ट्रेसर) के रूप में कार्य करती है।

तुलसी के उपयोग: #Uses of Tulsi

  • यह हर्बल टी के रूप में भी उपयोग में लाई जाती है क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं।
  • तुलसी के तेल का प्रयोग कानों के लिए एयरड्राप के रूप में किया जाता है।
  • इसका उपयोग सिरदर्द, अपच, कान दर्द, बुखार, मिर्गी, हैजा, अनिद्रा, मलेरिया आदि जैसी आम बीमारियों को शीघ्र दूर करने के लिए किया जाता है।
  • तुलसी का पौधा आस्था का प्रतीक है। यह माना जाता है कि तुलसी हमें नकारात्मक प्रभावों से बचाती है। इसी वजह से यह हर जगह उगाई जाती है।
  • तुलसी की लकड़ी हस्तशिल्प आभूषणों के लिए उपयोग में लाई जाती है।

उपयोग के निर्देश: #Use Directives

तुलसी की पत्तियां, तुलसी का पाउडर या तुलसी टेबलेट को सामान्य पानी के साथ लिया जाना चाहिए।

एमवे न्यूट्रीलाइट तुलसी: #Amway Tulsi

Amway एक बहुदेशीय कंपनी है। जो उत्तम श्रेणी के प्राकृतिक सप्लीमेंट्स प्रदान करने के लिए विख्यात है। यहां तुलसी को बनाने का आधार प्रकृति की श्रेष्ठता, विज्ञान की श्रेष्ठता और परंपरागत बुध्दीमत्ता की श्रेष्ठता का अनूठा संगम है।

Amway तुलसी ही क्यों प्रयोग करें ?

  • उच्च स्तरीय उत्पादन प्रक्रिया: तमिलनाडु स्थित अत्याधुनिक प्लांट में उत्पादन की बेहतर उत्पाद प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
  • न्यूट्रास्यूटिकल गाइडलाइन अनुपालनकर्ता: एफ एस एस ए आई (FSSAI) द्वारा निर्धारित करें उत्पाद मार्गनिर्देशों का पालन करते हैं।
  • एक्टिव इनग्रेडिएंट: पौधों के एक्टिव इनग्रेडिएंट का ही प्रयोग करते हैं।
  • नॉन-जी एम ओ (Non-GMO) बीज: जेनेटिकली तैयार बीज प्रयोग में नहीं लाए जाते हैं।
  • सर्टिफाइड ऑर्गेनिक फार्म: श्रेष्ठ उत्पाद की शुरुआत शुद्ध जड़ी बूटियों के साथ करते हैं।
  • डीएनए फिंगरप्रिंटिंग हर्ब: जड़ी बूटियों की विभिन्न प्रजातियों में से सबसे अत्यधिक क्षमता वाली जड़ी बूटी का पता लगाने के लिए इस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाता है।
  • उपरोक्त सभी विशेषताओं के आधार पर उत्तम पीएसपी (शुद्धता, सुरक्षा और प्रभाव) की जड़ी बूटी का चयन करना।

तुलसी विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, जिंक, और आयरन का अच्छा स्रोत है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और इंसेक्टिसाइडल विशेषताएं होती हैं तुलसी की पत्तियों में गंदे पानी को शुद्ध करने की क्षमता भी होती है।

healthjaagran

Hopefully, i think now you would be aware about the features and health benefits of tulsi herb. Here tulsi benefits in Hindi language might have helped a lot to hindi lovers. Information regarding tulsi benefits in hindi has been shared to you so simply with deep understanding.

Enjoy and share your feelings about the article. Did it help you or not. Plz share and suggest us on e-mail.


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What Are the Amazing Facts on Ashwagandha Negative Side Effects

Ashwagandha is a powerful vitality booster. It is also known as sexual booster and immunity booster. Ashwagandha negative side effects must be noted for getting aware about its proper use.

Ashwagandha: An Adaptogen

It is an ancient evergreen medicinal shrub (woody, branched & multi stems plant which is taller than herb). Ashwagandha is classified as an adaptogen. It means that ashwagandha can help our body in managing stress.

It is being used over years to reduce stress, to increase energy levels and to improve concentration level.

Ashwagandha is a combination of sanskrit words ashva, meaning horse and gandha, meaning smell. It shows that the root of ashwagandha has a strong horse like smell. Main medicinal part of ashwagandha is its root. So always, it is advised to use its root for getting good benefits. Rather its root and orange-red berry, both are used for medicinal values.

Ashwagandha is also known as Indian ginseng, Winter cherry, Blue cohosh, Canaigre, Codonopsis or Eleuthero. It contains chemicals that helps in keeping calm the brain, lowers blood pressure, reduce inflammation(swelling), increase energy etc.

Botanical history

  • Botanical name of Ashwagandha is Withania somnifera (English).
  • Solanaceae or nightshade family.
  • The main biological active substances in the root are a variety of steroidal lactones (withanolides, withaferins), alkaloids (isopelletierine, anaferine) and saponins (sitoindoside).

Physical appearance & Origin

It is a small shrub with orange-yellow flowers. Mostly found in India and North Africa. Its root and leaves are used for treating most of health conditions.

Potential health benefits

  • It is beneficial for stress or anxiety reducer. It helps in fighting against stress, anxiety and depression by reducing cortisol (stress hormone) levels. Cortisol hormone is released by adrenal glands in response to stress and low blood sugar levels, which leads to fat storage in the abdomen.
  • Ashwangandha is a best herb for boosting up vitality or energy.
  • It is used as an adoptogen and helps in hair & skin health too.
  • It helps in improving brain health i.e. brain functioning, memory, concentration power, reaction time and ability to perform tasks.
  • Helps to cancer patients by reducing feeling of tiredness as it has anticancer properties.
  • It supports in fighting with inflammations (reduce markers of inflammation like c-reactive protein) and tumor growth.
  • It helps in reducing blood sugar level by increasing insulin secretions.
  • Supports in reducing high cholesterol level & high triglycerides level so that to maintain cardiac health.
  • Helps in increasing thyroid hormones level of hypothyroidic person.
  • Ashwagandha supports sexual satisfaction during sexual activity.
  • It can boost testosterone level & sperm quality and increase fertility in men so that to improve reproductive health.
  • Helps in increasing muscle mass and reducing body fat.
  • It helps in boosting immune system by promoting antioxidant effects.

Ashwagandha negative side effects

In case of typical dosage during a short term, following are side effects : Moderate headache, sleepiness and stomachache.

Limitations

Certain individuals like very small kids, pregnant & breastfeeding women, person with some ailments and person on some medications, must consult with doctors before taking Ashwagandha.

How to use (Use directives)

Suggested to take it at bed time with lukewarm milk.

Doses

As per our need, it varies from 200 mg to 500 mg per day.

Ashwagandha is a prominent medicinal plant in Ayurveda. Nowadays, it is being taken as a supplement due to its various health benefits.

Amway-Nutrilite Ashwagandha

“Amway-Nutrilite” provides best Ashwagandha because of its philosophy of best of scientific practices, best of nature and best of traditional knowledge.

Why should we use Amway Ashwagandha?

  • Amway Ashwagandha supplement manufacturing with best manufacturing practices i.e. GMP.
  • Use of DNA finger printing technique for selecting species & seed.
  • Use of Non GMO (Genetically modified organism) seeds.
  • Agriculture of herbs in certified organic farms.
  • Supplement ingredient combination is best with traditional knowledge.
  • High PSP (Potency, Safety and Purity) philosophy.

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Why Do We Need Vitamins and Minerals for Good Health: Hindi Podcast

Are you be aware about the need of nutrients in the body. Why do we need vitamins and minerals in our daily routine habits. Know the detailed information in Hindi audio podcast.

Why do we need vitamins and minerals

Given below is the Hindi podcast for you. It is to learn and gather information in Hindi language. Check and learn the information.

https://healthjaagran.com/wp-content/uploads/2020/05/definition-types-roles-functions-and-importance-of-vitamins-and-minerals-1.mp3
Definitions, types, roles, functions and importance of Vitamins and Minerals (HINDI): Health Jaagran

Micro-nutrients

Nutrients which are required in very much smaller qualities. They are smaller as compared to macro-nutrients in the body of an organism.

Types of micro-nutrients

  1. Vitamins (organic compounds): Water-soluble & Fat-soluble vitamins.
  2. Minerals (inorganic compounds): Macro-minerals & Trace minerals.

Vit D3 miracle

Dr. Strand, M.D.

Deep Nutrition

Vitamin D

Tulsi Botanical Name and Powerful Tulsi Health Benefits in the World

Have you heard about the most powerful antioxidant i.e. Tulsi. Tulsi is known as immunity booster. Here, we are going to elaborate tulsi health benefits and importance of tulsi herb in maintaining your health. Tulsi botanical name is Ocimum Sanctum.

Are you looking for boosting your immunity system?

OR

Are you looking for antioxidants?

You need antioxidants to fight against infections for keeping your body healthy. Antioxidants help in maintaining the basic conditions of your body so that to carry out metabolic activities in proper way.

You can say that antioxidants works like a cleanser for your body just like your household cleansers of house. The difference is that household cleansers are used for maintaining your house and antioxidants clean unwanted substances from your body.

-Health Jaagran

Tulsi: An Antioxidant

Tulsi is also known as holy basil (in English) or Indian basil. It is a Sanskrit name. Tulsi botanical name is Ocimum Sanctum. In India, this herb is known as “Queen of all herbs” and regarded as the avatar of goddess Lakshmi. So, also known as “Shri (Lakshmi) Tulsi” or “Rama Tulsi” or “Vishnu Tulsi”.

During this pandemic situation, you need to take food with full of antioxidants and organic supplements regularly so that to make your body for capable of fighting against covid-19 infection.

-Tikendra S Kunwar

Tulsi is grown up in almost every house of Indian Hindu family households as a fact of holy herb i.e. Goddess of health, wealth and prosperity. Importance of Tulsi herb in our culture is as much as the importance in our life.

Appx. 60 species are all over world. Tulsi herb is widely categorized in two categoriesHoly basil (Tulsi botanical name= ocimum sanctum) and Mediterranean basil (Tulsi botanical name= ocimum basilicum).

Types of Indian Tulsi: Tulsi Botanical Name

  1. Rama Tulsi or Shri Tulsi or Ocimum sanctum (Green leaves): Mostly found in India, China, Brazil and Eastern Nepal regions.
  2. Krishna Tulsi or Shyama Tulsi (Purple leaves): Mostly in India, Asia region.
  3. Vana Tulsi (Wild leaves): Mostly found in Asia and Africa.
  4. Kapoor Tulsi (Heavy flowered): Mostly found in India and U.S.

Rama Tulsi and Krishna Tulsi are used widely in Ayurveda. Purple leaf Tulsi is beneficial to treat throat infections, respiratory system, nasal lesions, earache and skin diseases. Above four types of Tulsi comes under major category of Holy basil.

Looking for purchase ?

Arial part of Tulsi is used as medicinal decoctions (Karha soup). Tulsi leaves are oval shaped, green or purple colored, sharp tip and slightly toothed edges in appearance.

Health Benefits of Tulsi Leaves

  • Chief benefit is to boost up immune system of our body.
  • Tulsi has antioxidant effect so helps in reducing free radical damages in our body.
  • It helps in body fluid, hormonal and enzymatic regulations.
  • It acts as an anti-bacterial, anti-biotic, germicidal and fungicidal herb e.g. prevention from fever (antipyretic action).
  • Tulsi helps in proper functioning of pancreatic beta cells so that to help in insulin regulation i.e. acts as a diabetes preventer.
  • Tulsi prevents and protects against cardiovascular diseases.
  • It acts as a diuretic and detoxifier so that to help in reducing uric acid.
  • Tulsi also has many properties like anti-inflammatory (swelling reducer), analgesic (pain-reducer), hepatoprotective (liver-protector), cancer-fighter, blood vessel-protector, de-stressor etc.

Uses of Tulsi

  • It is used as herbal tea and gives benefits as an antioxidant.
  • Tulsi oil is used as an ear drop.
  • It can be used to recover instant headache, fever, indigestion, hysteria (mirgi), insomnia (sleeplessness), cholera (heja), malaria like problems.
  • This plant is believed to protect us from negative influences so planted by everyone.
  • Tulsi wood is used as handicraft jewelry items.

How to use (Use directives)

It is suggested to take tulsi leaves, tulsi powder or tulsi tablet with normal water.

Tulsi is a good source of vitamin A, Vitamin C, Calcium, Zinc, Iron and it acts as anti-bacterial & insecticidal properties and its leaves have capabilities to purify contaminated water.

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Amway-Nutrilite Tulsi

Amway provides best organic supplements and that’s why it is a best source of herbal tulsi. Amway tulsi is made up with best of science practices, best of nature and best of traditional wisdom.

Why should we use Amway-Tulsi ?

  • Manufacturing of Amway Tulsi with good manufacturing practices, GMP.
  • Tulsi herb species identified and selected with DNA finger printing technology.
  • Use of Non-GMO (Genetically modified organism) seeds for cropping.
  • Use of certified organic farms for herbs farming practices.
  • High PSP (Potency, Safety and Purity) philosophy.
Amway – Nutrilite Tulsi

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Conclusion

You get to know that antioxidants play relevant role in your healthy lifestyle. Tulsi is a strong antioxidant and has several benefits for maintaining health of human body. Importance of Tulsi herb is very much in Ayurveda and has too many other benefits other than medication like decoration, ear drop, tea etc. Tulsi botanical name helps in finding its family and features.

Amway Tulsi is so much authentic and powerful organic supplement for building your immune system because of having high potency, purity & safety.


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Health Meaning in Hindi and Its Importance : Hindi Podcast

Health is wealth. So, we need to be aware about its importance. Know health meaning in Hindi and help yourself in booting healthy life.

Health Definition, Types, Health Pillars and Importance Of Health: HINDI

Check and listen given below audio file to know definition of health, its types and importance for getting healthy lifestyle.

https://healthjaagran.com/wp-content/uploads/2020/05/health-definition-pillars-and-its-importance-1.mp3
Episode – Health definition, types, pillars and its importance (HINDI): Health Jaagran

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Mineral and Energy Resources for Our Healthy Life: Trace Minerals

What is micro-nutrient definition, types and its importance. Be aware about vitamins and minerals, mineral and energy resources, their categories and salient features.

Also, here you are going to know about the functions, sources, RDA, deficiencies and excess toxicity effects of some minerals. Those minerals are iron, zinc, iodine, selenium, manganese, copper and fluorine.

Micro-nutrients (Micro means very small)

Nutrients which are required in very much smaller qualities as compared to macro-nutrients in the body of an organism.

Types of micro-nutrients

  1. Vitamins (organic compounds): Water-soluble & Fat-soluble vitamins.
  2. Minerals (inorganic compounds): Macro-minerals & Trace minerals.

A). VITAMINS

Vitamins are micro organic compounds. These are made up by plants and animals, which can be broken down by heat, acid or air.

Categorized into two types: i). Water-soluble & ii). Fat-soluble vitamins.

i). Water-soluble vitamins (Vitamin-B group & C)

ii). Fat-soluble vitamins (Vitamin A, D, E, K)

B). MINERALS

Minerals are inorganic compounds present in soil or water and cannot be broken down.

Categorized into two types: i). Major or Macro-minerals & ii). Trace minerals.

i). Major or Macro-minerals

ii). Trace minerals

Minerals which are required in smaller quantity (mcg, µg or mg) than macro minerals.

Salient features of trace minerals
Iron
  • Iron: (RDA= 17 – 20 mg/day)
    • The amount of iron in our body is too less i.e. only appx 5 gm. But it plays very crucial functions in our body.
    • This is a component of Hemoglobin in the blood.
    • Iron absorption is enhanced with acidic environment.
    • Iron must be consumed in accompany with lemonade or salty chhach or fresh juice.
    • Excessive dietary fiber & consumption of tea or coffee (in any form just after meal) can hamper the absorption of iron.
    • Functions:
      • It helps in oxygen transportation from lungs to various organs and carbon dioxide from the organs to the lungs.
      • Helps in making some hormones.
      • It is present in the muscles in the form of Myoglobin for the storage and use of oxygen.
      • It helps in the formation of ATP for energy utilization in the cells.
      • Supports in detoxification of liver from residue of drugs.
      • It helps in strengthening of immune system.
      • It has a role of co-factor for many enzymes.
      • Plays a role in formation of the neurotransmitters.
    • Sources:
      • Fish, Meat, Egg, Lotus, Spinach, Mustard leaves, Mint leaves, Potato and Onion. Also in Bathua, Banana, Dates, Sesame seed, Coconut, Almond, Apricots, Walnut, Whole grain, Bajra, Pea, Gram etc.
    • Deficiencies:
      • Anaemia, which affects optimal growth, stamina, academic performance, physical activity etc.
    • Excess:
      • It is uncommon. But excessive consumption can lead to liver damage, heart diseases and gastro-intestinal disorders.
Manganese
  • Manganese: (RDA= 4 mg/day)
    • It plays vital role in bone formation, blood clotting and reducing inflammation.
    • It is stored in liver, brain, kidney, pancreas and bones.
    • Functions:
      • Helps in metabolism of carbohydrates, amino acids and cholesterol.
      • It supports bone health and reduce blood sugar.
      • Helps in healing wounds.
      • It helps in forming antioxidant enzymes such as superoxide dismutase (SOD) so that to help in building immune system.
    • Sources:
      • Pine apple, Beans, Sweat potato, Spinach, Green and black teas. Also found in Brown rice, Whole wheat bread, Almonds etc.
    • Deficiencies:
      • Growth retardation.
      • Reduced glucose tolerance.
      • Skeletal or bone abnormalities.
      • Infertility.
    • Excess:
      • Respiratory diseases like acute bronchitis.
      • Muscle spasms in face.
      • Tremors and irritability.
      • Hallucinations.
Copper
  • Copper: (RDA= 900 mcg/day or 1.7 mg/day)
    • It plays a vital role in making RBCs, nerve cells and immunity.
    • It is stored in liver.
    • Most of copper found in liver, kidney, brain, heart and skeletal muscles.
    • Functions:
      • Helps in formation of connective tissues and nervous system functioning (neuron signaling).
      • It helps in absorption of iron and energy production.
      • Helps in cardiovascular functions.
      • It helps in improving immune system and reducing free radicals.
    • Sources:
      • Whole grains, Potato, Beans, Yeast, Green leafy food, Cocoa, Black pepper, Meat etc.
    • Deficiencies:
      • Causes cardiovascular diseases and thyroid problems.
      • Menkes disease/ syndrome (genetic defects, growth failure & nervous deterioration)
      • High risk of osteoporosis.
      • Poor immunity.
      • Deficiency may be cause of high intake of Vit.C and zinc.
    • Excess:
      • Nausea
      • Stomach pain
      • Headache
      • Diarrhea
      • Vomiting
      • Dizziness
      • Heart problems, RBCs abnormalities and Jaundice.
Zinc
  • Zinc: (RDA= 10 – 12 mg/day)
    • It is a component of more than 300 enzymes.
    • Zinc is involved in synthesis and degradation of macro and micro nutrients.
    • It is known for reducing severity & frequency of diarrhea. Also acts for improving symptoms of pneumonia, respiratory infections & cold.
    • Functions:
      • Helps in synthesis of genetic expression.
      • Helps in building immune system and wound healing.
      • It is a part of antioxidant mechanism of our body.
      • Helps in metabolism of protein.
      • Supports in storage, production and release of insulin.
      • Helps in structure formation and functioning of cell membranes.
      • Helps in synthesis of the active form of Vit. A for visual pigments.
    • Sources:
      • Whole grain, Wheat, Gram, Soybeans, Pumpkin seed and Watermelon. Also from Sunflower seed, Milk, Chicken, Fish, Egg, Spinach, Mustard, Bathua, Potato, Banana, Orange etc.
    • Deficiencies:
      • Retardation in growth and maturation
      • Poor immunity
      • Diarrhea
      • Hair loss
      • Reduced appetite
      • Delayed wound healing
    • Excess:
      • Causes copper deficiency and lead to:
        • Vomiting
        • Diarrhea
        • Nausea
        • Cramps
        • Weak immune functions
Iodine
  • Iodine: (RDA= 150 mcg)
    • It is a constituent of the thyroid hormone T4(Thyroxine) and T3(Triiodothyronine). These hormones are critically required for metabolic activities.
    • Functions:
      • Helps in thyroid regulations.
      • It helps in growth, development and functioning of brain.
      • Regulates the speed of oxidation within cells and tissues.
      • It plays important role in metabolism of all nutrients, especially energy.
      • Development of muscle and nervous tissues.
      • Maintain circulatory system.
    • Sources:
      • Iodized salt, Sea salt, Salt water fishes, Sea vegetables, Potato, Spinach, Broccoli, Soybean, Almonds, Oats etc.
    • Deficiencies:
      • Goitre – Enlargement of thyroid gland due to iodine deficiency.
      • Cretinism – Incomplete physical development & mental retardness in infants and young children.
      • Hypothyroidism.
    • Excess:
      • Hyperthyroidism
      • Thyroid cancer
      • Auto-immune thyroid disease
Fluoride or Fluorine
  • Fluoride or Fluorine: (RDA= 1.5 – 2.0 mg/day)
    • It fights bacteria of mouth for the maintenance and safety of teeth.
    • Functions:
      • Helps in bone and teeth health
      • It helps to make the tooth enamel more resistant to the action of acids. These acids are produced by the bacteria present in the mouth.
    • Sources:
      • Fluorinated water, Sea foods, Salt water fishes, Tea and Foods growing in fluorine rich soil (through water, fertilizers etc.).
    • Excess:
      • Dental fluorosis
      • Skeletal fluorosis (stiffness of spine, arthritis, paralysis etc.)
      • Knock knee syndrome.
Selenium
  • Selenium: (RDA= 40 - 55 mcg/day)
    • It is important for cognitive function, immune system and fertility in both men and women.
    • Functions:
      • Helps in reducing the risk of miscarriage.
      • It protects against asthma.
      • Helps in cardiovascular functions.
      • Helps in thyroid regulation and reproduction health. Also, helps in prevention from free radicals.
      • It prevents  HIV from progressing to AIDS.
  • Sources:
    • Egg, Brown rice, Fish, Brazil nuts, Sea food, Meats etc.
    • Deficiencies:
      • Fatigue
      • Poor immunity
      • Brain fog
      • Infertility
    • Excess:
      • A garlic-like smell on the breath and a metallic taste in the mouth.
      • Brittle nails and mottled or decaying teeth.
      • Gastrointestinal problems such as nausea.
      • Neurological abnormalities
      • Fatigue and irritability
      • Skins lesions and rashes
      • Hair loss

Minerals are vital as compared to Vitamins. Lack of vitamins causes diseases but lack of minerals may cause even death.

-healthjaagran

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Nutrients Meaning in Hindi : Healthy Nutrition, पोषक तत्व (न्यूट्रिएंट्स)

Here, we are going to explain the nutrients meaning in Hindi language. You would be enjoy the article. So, keep learning with patience. It would be helpful to every common countryman of India.

पोषक तत्व (Nutrients meaning in Hindi) क्या है ?

भोजन से प्राप्त होने वाले वो रसायनिक पदार्थ (केमिकल सब्सटेंस), जो किसी भी जीव के शरीर के विकास, मरम्मत, रखरखाव और प्रजनन(रिप्रोडक्शन) प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य होते हैं, उन्हें पोषक तत्व कहा जाता है।

पोषक तत्व शरीर को पोषण प्रदान करते हैं और शरीर के विकास और रखरखाव के लिए अति आवश्यक है। पोषक तत्वों के हमारे शरीर में विशिष्ट कार्य हैं और उनके कार्य के अनुसार ही उनकी भिन्न-भिन्न मात्राएं हमारे शरीर को चाहिए होती है।

कृपया ध्यान में रखें कि पोषक तत्व(न्यूट्रिएंट्स) हमारे शरीर के पोषण का स्रोत हैं, जैसे भोजन, जो जीव द्वारा ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। जबकि पोषण विज्ञान(न्यूट्रीशन) एक जैविक क्रिया है, जिसके अंतर्गत भोजन का पाचन करके अवशेष पदार्थो को शरीर से निष्कासित किया जाता है।

अलग-अलग प्रकार के जीवों की, आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरतें अलग-अलग होती हैं।

बड़े पैमाने पर देखा जाए तो पोषक तत्वों को दो वर्गों में बांटा गया है।

पहला, जैविक या अकार्बनिक (ऑर्गेनिक)

दूसरा, अजैविक या अकार्बनिक (इनऑर्गेनिक)

जैविक(ऑर्गेनिक) पोषक तत्वों में ऐसे योगिक(कंपाउंड्स) सम्मिलित होते हैं जिनमें कार्बन शामिल होता है।

अजैविक(इनऑर्गेनिक) पोषक तत्वों में ऐसे योगिक(कंपाउंड्स) सम्मिलित होते हैं जिनमें कार्बन शामिल नहीं होता है।

जानवरों की तुलना में पेड़-पौधों के पोषक तत्वों की जरूरतें बदलती रहती हैं और अलग भी होती हैं, क्योंकि पेड़ पौधे बहुत से पोषक तत्वों को खुद ही निर्मित करते रहते हैं। पेड़ पौधों को लगभग 17 पोषक तत्वों(न्यूट्रिएंट्स) की जरूरत होती है जिनमें से 9 मैक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं (nitrogen (N), phosphorus(P), potassium(K), calcium(Ca), sulfur(S), magnesium(Mg), carbon (C), oxygen(O) and hydrogen(H)) और 8 माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं (iron (Fe), boron (B), chlorine (Cl), manganese (Mn), zinc (Zn), copper (Cu), molybdenum (Mo) and nickel (Ni)).


किसी भी जीव के पोषक तत्वों की आवश्यकता के आधार पर पोषक तत्वों को दो वर्गों में बांटा गया है

मैक्रोन्यूट्रिएंट्स(Macro-nutrients)

पहला, मैक्रोन्यूट्रिएंट्स: इस वर्ग के अंतर्गत वे पोषक तत्व आते हैं, जो जीवों को अधिक मात्रा में चाहिए होते हैं (ग्राम्स या ओंस )

  • इसके अंतर्गत रासायनिक पदार्थ जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट और पानी आते हैं।
  • इसके अंतर्गत रासायनिक तत्व जैसे कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर और फास्फोरस आते हैं। यह 6 रासायनिक तत्व सभी जीवों के लिए मैक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं।
  • माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जीवो को विकास और रखरखाव के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं
  • जीवों के शारीरिक निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट ऐसे पदार्थ हैं जो अलग-अलग प्रकार के शुगर से मिलकर बनते हैं। कार्बोहाइड्रेट को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है पहला, मोनोसैकेराइड्स दूसरा,डाईसैकेराइड्स तीसरा, ओलिगोसैकेराइड्स और चौथा पॉलिसैकेराइड्स।
  • प्रोटीन जैविक पदार्थ हैं, जो अमीनो एसिड्स से मिलकर बने हुए होते हैं और अलग-अलग प्रकार के अमीनो एसिड्स आपस में पेप्टाइड बॉन्ड से जुड़े हुए होते हैं। प्रोटीन भोजन के रूप में लिया जाता है और शरीर में पाचन क्रिया के दौरान प्रोटीएज नामक एंजाइम की सहायता से दोबारा अमीनो एसिड्स में तोड़ा जाता है ताकि अमीनो एसिड्स की अलग-अलग संरचनायें शरीर के विभिन्न हिस्सों में कार्य अनुसार प्रतिक्रिया में सहायक बने।
  • फैट्स या वसा, ग्लिसरीन और फैटी एसिड का मिलाजुला योगिक है, जिसमें कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, एचडीएल, एलडीएल, वीएलडीएल आदि का भी योगदान रहता है।
    • ऊर्जा प्राप्ति: फैट्स (9 किलो कैलोरी पर ग्राम), प्रोटीन (4 किलो कैलोरी पर ग्राम), कार्बोहाइड्रेट्स (4 किलो कैलोरी पर ग्राम)। शरीर के कार्यों को करने के लिए जिस ऊर्जा की आवश्यकता शरीर को होती है वह ऊर्जा सबसे पहले कार्बोहाइड्रेट्स से, फिर फैक्ट्स से और अंत में प्रोटीन से ली जाता है।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स(Micro-nutrients)

दूसरा, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स: इस वर्ग के अंतर्गत वे पोषक तत्व आते हैं, जो जीवों द्वारा मैक्रोन्यूट्रिएंट्स की तुलना में कम मात्रा में चाहिए होते हैं (मिलीग्राम या माइक्रोग्राम )

  • इस वर्ग में विटामिन और मिनरल सम्मिलित हैं।
  • कोशिकाओं के जैव-रासायनिक और शारीरिक कार्यों के लिए अनिवार्य हैं।
  • शरीर को बैक्टीरिया, वायरस आदि से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • मिनरल्स एसे तत्व हैं, जो चयापचय(मेटाबोलिक) क्रियाओं के लिए अति आवश्यक होते हैं।
  • विटामिंस एसे जैविक पदार्थ हैं, जो हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक हैं और भिन्न भिन्न प्रकार के प्रोटींस के लिए को-फैक्टर या को-एंजाइम की तरह काम करते हैं तथा मेटाबोलिक नियंत्रक और एंटीऑक्सीडेंट्स की भूमिका भी निभाते हैं।
  • विटामिन्स की कमी से बीमारी होती है। लेकिन मिनरल्स की कमी से मौत भी हो सकती है, क्योंकि हमारे अंग प्रणाली में, मिनरल्स के बहुत ही अहम् कार्य होते हैं, जैसे- आयरन की कमी से शरीर में हिमोग्लोबिन का कम होना, कैल्शियम की कमी से हार्ट अटैक होने की संभावना आदि।

आवश्यक पोषक तत्व(एसेंशियल न्यूट्रिएंट्स)

ऐसे पोषक तत्व जो किसी जीव द्वारा उसकी शारीरिक और जैव रासायनिक क्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं। लेकिन उन पोषक तत्वों का जीव के शरीर में या तो अभाव होता है या फिर जीव के शरीर में बनते ही नहीं है। साधारण भाषा में हम यह कह सकते हैं कि जीव को उन पोषक तत्व को भोजन के रूप में बाहर से लेना होता है।

  • भोजन से ही लेना होता है।
  • मेटाबोलिक क्रियाओं के लिए अति आवश्यक पोषक तत्व होते हैं।
  • आवश्यक पोषक तत्वों की सूची: 9 अमीनो एसिड्स (phenylalanine, valine, threonine, tryptophan, methionine, leucine, isoleucine, lysine, and histidine), 2 फैटी एसिड्स (alpha-linolenic acid (an omega-3 fatty acid) and linoleic acid (an omega-6 fatty acid)), 13 विटामिंस (vitamins A, C, D, E(tocopherols and tocotrienols), K, thiamine (B1), riboflavin (B2), niacin (B3), pantothenic acid (B5), pyridoxine (B6), biotin (B7), folate (B9), and cobalamin (B12), 15 मिनरल्स (potassium, chloride, sodium, calcium, phosphorus, magnesium, iron, zinc, manganese, copper, iodine, chromium, molybdenum, selenium and cobalt (component of vitamin B12).
  • उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए, हमें इन पोषक तत्वों को अच्छे भोजन के साथ साथ खाद्य सप्लीमेंट्स के रूप में भी अलग से लेना होता है।

अनावश्यक या गैर जरूरी पोषक तत्व

ऐसे पोषक तत्व जो किसी भी जीव के शारीरिक और जैव रासायनिक क्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं। लेकिन उन्हें बाहर से लेने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि वे पोषक तत्व जीव के शरीर में स्वतः ही निर्मित होते रहते हैं एवं बाहरी स्रोत या शरीर में उनकी उचित मात्रा उपलब्ध होती है।

  • शरीर में खुद ही बनते रहते हैं।
  • खाद्य सप्लीमेंट्स के रूप में लेने की आवश्यकता नहीं है।

फाइटोन्यूट्रिएंट्स या प्लांट न्यूट्रिएंट्स

पेड़ पौधों से प्राप्त होने वाले मुख्य पोषक तत्वों को फाइटोन्यूट्रिएंट्स या प्लांट बेस्ड न्यूट्रिएंट्स कहा जाता है। ये पोषक तत्व पौधों से प्राप्त होने वाले रासायनिक तत्वों के रूप में जाने जाते हैं जिनमें पौधों से प्राप्त होने वाले पोषक और ग़ैर-पोषक तत्व दोनों ही सम्मिलित होते हैं। जैसे पॉलिफिनॉल्स, फ्लेवोनॉयड्स, रेसवेराट्रॉल और लिगनेंस आदि।

Phyto-nutrients are plant based compounds which are rich in antioxidants and are key ingredients to help neutralize free radical damages.

Combination of vitamins and minerals with phyto-nutrients induces high potential effect of nutrients for empowering immune system of an organism.
  • इनमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव होते हैं। हम देखते हैं कि पेड़ पौधों का जीवन लंबा और शानदार होता है।
  • ये पोषक तत्व पेड़-पौधों के रंग और छिलके से प्राप्त होते हैं।
  • अभी भी इन तत्वों की खोजबीन जारी है कि, ये जीवों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में कितने समर्थ हैं।

“Nutrients are lifeline of our healthy and wealthy lifestyle” – healthjaagran

Nutrients meaning in English.

You might have learnt so much things about nutrients meaning in Hindi. This article would be helpful to you. So, please feel free to share your feelings with us to grow more in life. Normally, it is tough to find exact nutrients meaning in Hindi language. But, here you found lots of information about different types of nutrients in Hindi version.