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Diabetes Is Caused by Bad Lifestyle of People in the World: डायबिटीज

Diabetes is in the list of top 10 most common diseases in the world. Diabetes is caused by bad lifestyle of people. It is not a pandemic rather it is a lifestyle disease. Here, the complete cruspy information is being provided in hindi language.

डायबिटीज, जिसे हम हाई ब्लड शुगर के नाम से जानते हैं। इंडियन संदर्भ में अगर बात करें तो, पिछली सदी से भारत में इसे मधुमेह या हनी यूरिन के नाम से जाना जाता है।

डायबिटीज क्या है ?

#What is Diabetes in Hindi

डायबिटीज, एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर या फिर कहें चयापचय विकार है। मतलब एक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रोग है, जिसका संबंध डाइजेस्टिव सिस्टम (पाचन तंत्र) से है। इसमें ब्लड शुगर बढ़ जाता है या फिर कहें ग्लूकोस की मात्रा बढ़ जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डायबिटीज दुनिया के शीर्ष 10 रोगों में से एक है जिसकी वजह से सबसे ज्यादा लोगों की मृत्यु होती है। दुनिया भर में लगभग 500 मिलियन लोग इससे ग्रसित हैं। 1980 में यह आंकड़ा लगभग 100 मिलियन का था। आज इन 35-40 सालों में यह 5 गुना हो गया है। दुनिया भर में लगभग 5 मिलियन लोगों की मौत हर साल डायबिटीज से होती है। दुनियाभर में अगर बात करें तो चाइना के बाद, भारत दूसरे नंबर का देश है। जिसमें सबसे ज्यादा डायबिटिक रोगी हैं।

डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, डायबिटीज में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। इसका कारण या तो पहला वंशानुगत (हैरीडेट्री जींस) या फिर दूसरा पोषण की कमी हो सकती है।

वास्तव में होता क्या है ?

#Process Of Glucose Formation

हमारा शरीर तीन प्रकार से ग्लूकोज प्राप्त करता है।

पहला तरीका है,

इंटेस्टाइनल अब्जॉर्प्शन आफ फूड (आंतों में भोजन से ग्लूकोज का शोषण)

जब हम खाना खाते हैं तो हमारे आमाशय (स्टोमक) में खाना पचता है। छोटी आंत, लीवर, पेनक्रियाज, गॉलब्लैडर से होते हुए बड़ी आंत से एनस के रास्ते बाहर निकल जाता है। जब हमारा खाना पचता हुआ छोटी आंत तक पहुंचता है तो छोटी आंत के ल्यूमन भाग में स्थित माइक्रो विली (स्पिंडल लाइक स्ट्रक्चर) इस पचे हुए खाने से पोषक तत्वों व ग्लूकोज को छोटी आंत के दूसरे हिस्से मे यानी रक्त (ब्लड) में स्थानांतरित करते हैं। फिर सभी पोषक तत्व व ग्लूकोज रक्त के जरिए शरीर के सभी भागों तक पहुंचते हैं। यह पहला तरीका है जिससे हमारा शरीर ग्लूकोज प्राप्त करता है।

दूसरा तरीका है,

ब्रेकडाउन ऑफ ग्लाइकोजन के द्वारा

ग्लाइकोजन क्या होता है? (#What is Glycogen) यह ग्लूकोज का संग्रहित (स्टोरेज) फॉर्म है। शरीर में जब खाने से लिये गए ग्लूकोज की मात्रा अत्यधिक हो जाती है तो इंसुलिन हार्मोन ग्लूकोज की इस अत्यधिक मात्रा को ग्लाइकोजन में बदल कर मसल्स और लीवर की कोशिकाओं में संरक्षित रखता है। ताकि शरीर को जरूरत पड़ने पर इस संरक्षित किए गए ग्लूकोज, जिसे हम ग्लाइकोजन के नाम से जानते हैं। इसे प्रयोग में लाया जा सके। ग्लूकागोन हार्मोन की सहायता से ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में परिवर्तित किया जाता है। यह दूसरा तरीका है जिससे हमारे शरीर को ग्लूकोज मिलता है।

तीसरा तरीका है,

ग्लूकोज जनरेशन फ्रोम नॉन कार्बोहाइड्रेट सब्सट्रेट इन द बॉडी

मतलब जो प्रोटीन और वशा (फैट्स) हमारी बॉडी में होते हैं, उनके द्वारा भी हमें ग्लूकोज मिलता है। अगर कार्बोहाइड्रेट हमारी बॉडी में कम है, तो प्रोटीन और फैट्स से भी हमें ग्लूकोज प्राप्त होता है। जिस भी प्रकार से हमें ग्लूकोज मिलता है, उसकी मात्रा को संतुलित (बैलेंस) करने का काम होता है इंसुलिन हार्मोन का, जो की पेनक्रियाज के अंदर बीटा कोशिकाओं के द्वारा बनाया जाता है। इंसुलिन हार्मोन ग्लाइकोजन ब्रेकडाउन की प्रक्रिया और ग्लूकोज जनरेशन की प्रक्रिया को रोक सकता है (जो नॉन कार्बोहाइड्रेट सब्सट्रेट से होते हैं) और ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में मसल्स कोशिकाओं व लीवर कोशिकाओं में संग्रह कर सकता है।

मेटाबोलिक एक्टिविटी

#Metabolic Activity

पूरी मेटाबोलिक एक्टिविटी की बात करें तो जैसे ही हम खाना खाते हैं ।पेनक्रियाज, इंसुलिन हार्मोन को उत्पन्न करता है और इंसुलिन उस खाने को ग्लाइकोजन के रूप में लीवर और मसल्स कोशिकाओं में संग्रहित करता है ताकि शारीरिक जरूरत पड़ने पर ग्लाइकोजन को ग्लूकागोन हार्मोन की सहायता से ग्लूकोज में परिवर्तित करके प्रयोग में लाया जा सके। इंसुलिन एक कैरियर की तरह काम करता है।

इंसुलिन, ग्लूकोज को क्रोमियम की सहायता से कोशिका के अंदर ले जाने में सहायक होता है। क्रोमियम, इंसुलिन रिसेप्टर्स के साथ काम करके इंसुलिन को कोशिकाओं के अंदर आने में मदद करता है। जिससे कि ग्लूकोज लीवर और मसल्स कोशिकाओं के अंदर ग्लाइकोजन के रूप में संग्रहित सके। इसके विपरीत ग्लूकागोन हार्मोन लीवर और मसल्स कोशिकाओं से संग्रहित ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदलकर ब्लड शुगर या कहें ग्लूकोज स्तर को सामान्य बनाए रखता है।

शरीर की कोशिकाओं के द्वारा ग्लूकोज का शोषण ना होने के मुख्य कारण क्या हैं ?

या

ब्लड शुगर बढ़ने के कारण क्या हैं ?

या

डायबिटीज होने के कारण क्या हैं ?

#Reasons Of Diabetes: Diabetes is caused by

पहला कारण है,

इंसुलिन की मात्रा कम होना

Diabetes is caused by insufficient amount of insulin.

इससे ग्लूकोज संग्रहण (स्टोरेज) कम होता है। वास्तव में, पेनक्रियाज कम इंसुलिन बनाने लगता है। टाइप वन डायबिटीज में यह पहला कारण ही होता है। शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम बनती है जिसके कारण ग्लूकोज, कोशिकाओं के अंदर नहीं जा पाता और ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है।

दूसरा कारण है,

शरीर की कोशिकाओं द्वारा इंसुलिन हार्मोन को प्रतिक्रिया ना देना

Diabetes is caused by non response activity of body cells against insulin.

इस स्थिति में बॉडी सेल्स, इंसुलिन हार्मोन को प्रतिक्रिया (रिस्पांस) नहीं देते हैं। टाइप टू डायबिटीज में यही होता है। शरीर की कोशिकाओं में स्थित इंसुलिन रिसेप्टर्स, इंसुलिन को कोशिकाओं के भीतर प्रवेश नहीं होने देते हैं जिस वजह से कोशिकाओं में ग्लूकोज या ग्लाइकोजन संग्रहण नहीं हो पाता है और ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है।

तीसरा कारण है,

पोषक तत्वों की कमी के कारण इंसुलिन हार्मोन की कार्य क्षमता कम होना

Diabetes is caused by decrease in work potential of insulin hormone due to deficiency of nutrients

पोषण की कमी के कारण शरीर में इंसुलिन का दोषपूर्ण (डीफेक्टिवेनेस) होना, जिसके कारण इंसुलिन रिसेप्टर निष्क्रिय (इन एक्टिव) रहते हैं और वह इंसुलिन को स्वीकार नहीं कर पाते हैं, जिसकी वजह से ग्लूकोज, कोशिका (सेल) के अंदर नहीं जा पाता है।

अब बात करते हैं डायबिटीज के लक्षणों की,

डायबिटीज होने के लक्षण क्या हैं ?

#Symptoms Of Diabetes

1. डायबिटीज में आप देखोगे लोगों को अक्सर पेशाब (यूरिन) होने लगती है। जिस किसी को डायबिटीज होता है उसे जल्दी-जल्दी यूरिनेशन होता है।

2. मीठा खाने का बहुत मन करता है।

3. बहुत थकान होती है।

4. चिड़चिड़ापन होता है।

5. भूख बढ़ जाती है।

अगर हम डायबिटीज का समाधान या रोकथाम ना करें और उसको फिर आगे ले जाएं तो बहुत सारी जटिलताएं (कॉम्प्लिकेशंस) हमारे शरीर में आने लगती है और उन जटिलताओं की अगर बात करें, क्या होती हैं?

1. अंधापन होने लगता है। आंखों की नजर (विशन) कम होने लगती है।

2. अगर फिर भी ध्यान नहीं दिया तो किडनी भी फेल हो सकती है।

3. पैरों में अल्सर होने लगते हैं।

4. कोरोनरी रोग बढ़ जाते हैं।

5. नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है।

6. मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए हमें ध्यान देना चाहिए कि डायबिटीज को कैसे नियंत्रित रखें।

डायबिटीज के प्रकार

#Types Of Diabetes

हम जानेंगे कि विभिन्न प्रकार के डायबिटीज कौन-कौन से होते हैं।

सबसे पहला होता है, टाइप वन डायबिटीज: #Type 1 Diabetes

टाइप वन डायबिटीज मुख्यतः फैमिली हिस्ट्री से जुड़ा हुआ है। हम यह कह सकते हैं कि वंशानुगत जींस की वजह से टाइप वन डायबिटीज होता है।

यह बच्चों में ज्यादा पाई जाती है और आप देखोगे यह होता क्यों है? सबसे पहला कारण जो डायबिटीज का था। इंसुलिन की कमी के कारण यह टाइप वन डायबिटीज होता है और इसे इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज भी बोल सकते हैं क्योंकि इंसुलिन की कमी से होता है।

दूसरा होता है, टाइप टू डायबिटीज: #Type 2 Diabetes

हम पहले भी जान चुके हैं कि टाइप टू डायबिटीज की अवस्था में बॉडी सेल्स, इंसुलिन को प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, जिसकी वजह से ग्लूकोज कोशिकाओं के अंदर नहीं जा पाता और ब्लड में ही उसका लेवल बढ़ता जाता है। आज के समय में 90% लोग टाइप टू डायबिटीज से ग्रस्त हैं क्योंकि यह मुख्यतः लाइफ़स्टाइल की वजह से होता है।

आज के समय में, लोगों में शारीरिक व्यायाम का अभाव या अनियमितता है। आप देखोगे स्ट्रेस लेवल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। हम आराम बहुत कम कर रहे हैं और हमारी न्यूट्रीशनल वैल्यू बहुत कम हो गई है। हमारी व्यस्त और आधुनिक जीवनशैली की वजह से यह टाइप टू डायबिटीज होती है और इसे हम इन्सुलिन रेजिस्टेंस या फिर इन्सुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज भी बोल सकते हैं।

तीसरा प्रकार होता है, जेस्टेशनल डायबिटीज: #Gestational Diabetes

जेस्टेशनल डायबिटीज मुख्यतः प्रेगनेंसी के दौरान प्रेगनेंट वूमेन को होती है। प्रेगनेंट वूमेन को हाई ब्लड शुगर हो जाना एक सामान्य सी बात है। इसके लगभग 2 से 10 प्रतिशत मामले सामने आते हैं जो लगभग ठीक हो जाते हैं। उचित देखरेख और दवाइयों के माध्यम से प्रेगनेंट वूमेन को जेस्टेशनल डायबिटीज से आसानी से बचाया जा सकता है।

इसके अलावा चौथा प्रीडायबिटीज, यह क्या है: #Prediabetes

यदि टाइप टू डायबिटीज बहुत लंबे समय तक चलता है तो उसे प्रीडायबिटीज बोला जाता है।

और

पांचवा होता है, टाइप थ्री डायबिटीज: #Type 3 Diabetes

टाइप थ्री डायबिटीज की अवस्था में इन्सुलिन रेजिस्टेंस, ब्रेन सेल्स के द्वारा किया जाता है। इस अवस्था में दिमागी कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन को स्वीकार नहीं करते हैं जिसकी वजह से ग्लूकोज और अन्य पोषक तत्व दिमाग की कोशिकाओं में नहीं जा पाते हैं और ब्लड में उनकी मात्राएं बढ़ जाती हैं।

टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज में मुख्यतः क्या-क्या अंतर हैं ?

#Difference between type 1 and type 2 diabetes

टाइप वन डायबिटीज अचानक से होता है और टाइप टू डायबिटीज अक्सर धीरे-धीरे जीवन शैली के अनुसार होता है। टाइप वन डायबिटीज बच्चों में पाया जाता है और टाइप टू एडल्ट्स में होता है। टाइप वन डायबिटीज में पतले हो जाते हैं और टाइप टू मोटे लोगों में होता है।

डब्ल्यूएचओ, डायबिटीज डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया क्या कहता है?

#Diabetes Diagnostic Criteria

आप अगर भूखे पेट अपना ग्लूकोस स्तर देखते हैं तो 110 mg/dl से कम होना चाहिए और अगर हम सामान्यतः खाना खा चुके हैं और उसके बाद देखते हैं तो वह 140 mg/dl से कम होना चाहिए। यह एक डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया है जिससे हमें पता चल सकता है कि हमारा डायबिटीज लेवल क्या है? शुगर लेवल क्या है? या फिर, ग्लूकोज लेवल क्या है?

WHO Diabetes Diagnostic Criteria

मेडिकेशन और रोकथाम

#Medication and Prevention Of Diabetes

डायबिटीज से बचाव और रोकथाम करने के लिए हमें अपनी जीवनशैली और पोषण पर काम करना पड़ेगा।

जीवनशैली अच्छी रखने के लिए हमें सबसे पहले, नियमित व्यायाम (रेगुलर एक्सरसाइज) पर जोर देना चाहिए। रोजाना कम से कम आधे से एक घंटा समय व्यतीत करना चाहिए। डायबिटीज की बातें करें तो व्यायाम हमारे शरीर में इंसुलिन हार्मोन की तरह ही प्रभाव डालता है, इसलिए व्यायाम (एक्सरसाइज) बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

दूसरा, सकारात्मक व्यवहार (पॉजिटिव एटीट्यूड) होना चाहिए। हमें मानसिक रूप से सकारात्मक (पॉजिटिव) होना चाहिए, जिसके लिए हमें अच्छी-अच्छी किताबें पढ़नी चाहिए।

तीसरा, उचित आराम (एडेक्वेट रेस्ट) करना चाहिए। डॉक्टर भी कहते हैं कि 6-8 घंटे आराम करना चाहिए ताकि हमारे शरीर को शरीर की मरम्मत के लिए समय मिल सके।

चौथा, अच्छा पोषण होना चाहिए। फूड न्यूट्रिशन आज के समय पे बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हमारे शरीर की न्यूट्रिशनल पूर्णता के लिए हम क्या कर सकते हैं?

हम जान सकते हैं कि डायबिटीज के उपचार हेतु जो उपयोगी सप्लीमेंट्स हैं, वह क्या हैं?

  • ग्लूकोज हेल्थ,
  • विटामिन बी,
  • मल्टीविटामिन,
  • ओमेगा-3,
  • विटामिन सी,
  • कैल्शियम,
  • जींग सिंग,
  • प्रोटीन,
  • आयरन,
  • फॉलिक और
  • शुगर पाउडर

इन फूड सप्लीमेंट्स में भी अगर कहूं कि सबसे महत्वपूर्ण सप्लीमेंट्स क्या हैं?

#Supplements useful in diabetes
नेचुरल बी (विटामिन बी)

विटामिन बी, कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट है और यह हमारे शरीर के सारे मेटाबॉलिक एक्टिविटीज पर काम करता है इसलिए डायबिटिक रोगी के लिए यह महत्वपूर्ण है।

फाइबर

फाइबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फाइबर हमारे पाचन तंत्र (जी आई सिस्टम) पर काम करता है। यह पाचन तंत्र का सुधार करता है, क्योंकि हमारे खाने की गती को धीमा करता है और खाने से ग्लुकोज व अन्य पोषक तत्वों का शोषण करने में सहायता करता है। फाइबर से हमें क्रोमियम भी मिलता है, जो कि इंसुलिन के साथ मिलकर शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है।

मल्टीविटामिन

बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि मल्टी विटामिन हमारे शरीर में उर्जा उत्पन्न करने में सहायक है और जैसा कि हम जानते हैं डायबिटीज में ऊर्जा की कमी होती है, जिससे हमें बहुत थकान लगती है इसलिए मल्टीविटामिन का उपयोग करके डायबिटीज रोगी को ऊर्जा मिलती है और शरीर के अन्य रासायनिक क्रियाओं में भी सहायता मिलती है।

ओमेगा – 3

हम जान चुके हैं कि डायबिटीज एक जीवन शैली से संबंधित रोग है। शरीर में मुख्यतः ओमेगा 6 और ओमेगा 3 के बीच का असंतुलन होने के कारण अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। इसलिए डायबिटीज में शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए ओमेगा-3 का सेवन बहुत ही फायदेमंद है।

जिंग सिंग

इसमें ऐसे पोषक तत्व होते हैं जो इंसुलिन की तरह कार्य करते हैं इसलिए डायबिटीज में जिंग सिंग का उपयोग लाभदायक है।

प्रोटीन

डायबिटिक रोगी के शरीर का प्रोटीन टैंक बहुत ही तेजी से कम होता है और शरीर में प्रोटीन की कमी के कारण अन्य रोग होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इसलिए डायबिटीज के रोगी को रोजाना प्रोटीन लेने की आवश्यकता होती है।

Nutrients Help In Diabetes

Video: Diabetes in hindi

Use of organic supplements always helps in improving our health & stay fit us for enjoying the golden moments of life.

– Health Jaagran

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Growth of Healthcare Industry in India

Healthcare industry in India is a mixture of modern science and traditional wisdom. Health practices are done on the basis of science and natural aspects. We always says that “health is wealth”.

but,

Do we really accept that health is our wealth?

Perhaps it’s not truth in same sense. Because in the beginning of our life, we always indulge in earning money and later on usually we spend that earned money in keeping our health well. Friends, with our busy lifestyle, we are still following diseases rather we are not trying to understand the reason behind those diseases.

Health Is Wealth: Health Jaagran

Before 20th century, there were so many techniques of medical services like Yunani, Ayurveda, Acupressure, Acupuncture etc. and those techniques were not capable in curing infectious diseases. That’s why a new technique or we can say modern age of medical services evolved. Present allopathic services with biotechnology booms has been developed to overcome drawbacks of previous techniques.

But,

Today, the same situation has been raised as it was earlier due to change in the way of our living. Present medical facilities are just entertaining diseases rather than curing them. Coronary artery diseases, diabetes, asthma, blood pressure and many more diseases have become very common among us. These types of diseases are nothing but the only outcomes of our bad lifestyle. For fighting against these health challenges, we need to work on ourselves by transforming our thoughts so that to change our habits and ultimately improve our lifestyle.

Technology is growing as faster as possible against nature and which is not good for human beings to be healthy in future. So, we need to think about our next generation. What are we going to giving them.

In 21st century, beauty & health have become priorities of human being and modern trends are live example of this. Interest of people towards yoga, natural remedies and art of living signifies that the solution of our deteriorating lifestyle is in our hands and merely in our nature.

Nature and Organisms

Nature and organisms are living in surroundings to each other. Both are made by God in such a way that they can live in coordination with each other. But today we are in the “era of machinaries” due to curiosity and inventions of human beings for the search of convenience. This development has been induced a big gap in between nature and human beings.

Nature and Organisms: Health Jaagran

Our efforts to reduce this gap is very small and it is not as much as required to maintain that coordination. Ultimately, nature and human beings, both are going at there deteriorating condition. So we need to keep our nature as a priceless heritage so that to keep us in healthy and wealthy surroundings.


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Marigold Plant Care Benefits with Classification (GENDA PHOOL)

Marigold plant care is so beneficial for you. It has so many medicinal benefits. In addition, marigold plant is used as an ayurvedic plant.

Marigold Flower (Genda phool)

Medicinal plants are widely used in traditional culture. All over the world, medicinal plants are becoming popular in modern society. Because they are natural alternatives to synthetic chemicals.
All the parts of marigold plant i.e. Genda phool, are used for medicinal purposes. They have external amd internal benefits. So, marigold plant can be used externally or internally.

Classification Of Marigold

Latin name is Targetes erectalinn.
Family is Asteraceae.
Class is Magnoliophyta.
Genus is Targetes.
Species is Erecta.

It is found in native to Mexico, Central America, Bolivia, India & Colombia.

Marigold flower i.e. Genda phool, is a beautiful bright orange flower. An aromatic flower that grows during the winter season. It is a temperate climate flowering plant that grows up to 79 cm in height. Flower shed are solitary, long stalked and thickening upward.

Species Of Marigold

There are about 33 species of the genus Targetes. Out of which, few species are introduced in the Indian gardens.

  • 1) Tagetes glandulifera Schrank (Tagetes minuta L)
  • 2) Tagetes patula (French Marigold)
  • 3) Tagetes lucida (Mexican Marigold, Sweet Scented Marigold)
  • 4) Tagetes tenulifolia (Striped Marigold)

Medical Properties Of Marigold (Ayurveda)

1)Rasa (Taste) – Tikta (Bitter), Kashya (Astringent)

2)Guna (Qualities) – Laghu (Light for digestion), Ruksha (Dry in nature)

3)Veerya (Potencey) – Sheeta (Cold)

4)Vipaka (Ripeness) – Katu (Under go pungent taste after digestion)

5)Karma (Actions) – Kaphapitta shamaka (reduces vitilated kapha), pitta dosha.

Different parts of Genda Phool (Marigold Flower) are used in folk medicines. They have medicinal benefits in curing various diseases.


Flowers are beneficial in the diseases such as stomachache, fever, epileptic fit (mirgi ka dhaura), astringent, carminative (agni vardhak), scabies (khujli).

Leaves are used in muscular pain, kidney troubles, antiseptic and can also be applied in boils (ulcer).
Infusion of plant is used against cold, bronchitis and rheumatism.

Marigold Plant Care Benefits and Pharmacological Activities

1). Anti microbial activity
2). Insecticidal activity
3). Anti bacterial activity
4). Antioxidant activity
5). Wound healing activity
6). Anti diabetic activity

Content published by Mrs. Kalpana Kalakoti (M.Pharm.)


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Immunity How to Increase for Fighting Against Infections in Pandemic

At present time, we need to be aware about the pandemic (COVID-19) situations around us. Because it has been spreaded at fast pace and can be stopped only by our own willpower to fight against it by doing good habits and safe practices in our daily routine work. In fact, we know that older adults are at higher risk in this situation (#COVID-19) as compared to young adults. So, it is our sole responsibility to help them and care them. Also, we need to aware them about immunity, how to increase it.

For better health care of older people, we must know about geriatrics ?
So do you know,

What is Geriatrics?


• A branch of medicine or science that deals with the health problems, diseases and caring practices of old age people is known as geriatrics.
If anyone is willing to learn about geriatrics, mostly they are unable to find a geriatrician. Isn’t so ?
But it doesn’t mean that we can’t help our older adult people . We can do it by involving ourselves in the care of older adults and learning how to apply some of things what a geriatricians know.
• We all know that, with increase in the age of a person, diseases in the body of older people also increases. Some common diseases or problems in older adults are Immunity weakness , adult onset Diabetes , Arthritis, Kidney and bladder problems , Dementia , Parkinson’s disease, Cataracts, Osteoporosis, Macular degeneration, Cardiovascular diseases etc. These diseases are mostly because of lack of nutrition, physical in-activeness & positive attitude in our today’s lifestyle.

Do we know reasons?

Why older people are at risk?

Its most common factor, is “ WEAK IMMUNITY”.
So, how can we boost up immunity of our self & our older ones. We know that there is no vaccine for curing pandemic COVID-19. Immunity building could prevent us from infectious disease. So, be aware about immunity, how to increase it.

How to build immunity ?

•Eat a healthy diet which must be high in citrus fruits and vegetables.
•Do hard exercise regularly.
•Have a positive attitude.
•Use of organic products: Many products claim to boost or support immunity. But the concept of boosting immunity actually makes a little sense scientifically. In fact, boosting the number of cells in our body (immune cells or others) with the help of chemical products, is not necessarily a good thing . Using organic ways of boosting our #immune system is a good way.

Diet and Immune system ?

• Healthy immune system needs good and regular nourishment. Scientists, have long recognized that people who live in poverty and are malnourished are more prone to infectious diseases. Whether the increased rate of disease is caused by malnutritional effects on the immune system.
• There are some evidences which show that some micronutrients deficiencies — for example, deficiencies of zinc, selenium, iron, copper, folic acid, vitamins A, vitamin B6, vitamin C and vitamin E, are responsible for effecting immune system of our body.

So, what can we do? If we find that our diet is not providing us our daily need of nutrition.

Improve immunity with herbs and supplements ?

Most of us still thinks that taking supplements is not useful. Is it so ?
Walk into a health care store, and you will find bottles of pills and herbal preparations that claim to boost up your immunity. Demonstrating whether a herb or any substance, for that matter — can enhance immunity is, as yet, a highly complicated matter. Scientists don’t know, but choosing good products and healthy products for yourself must be useful in a way.

How Amway- Nutrilite supplements are useful in increasing immunity ?

Nutrilite is the brand that makes organic supplements with a philosophy of best in science, best in nature and best in traditional wisdom.

Following organic nutritional sources & #supplements help in boosting our immunity and make us capable of fighting against infections:

  • Protein (All plant protein)
  • Vitamin C (Natural C)
  • Vitamin A (Multi carotene)
  • Echinacea citrus concentrate plus
  • Vasaka, Mulethi, Surasa
  • Tulsi
  • Galic
  • Ashwagandha

Content published by Ms. Gunjan Nagarkoti (B.Sc. Nursing)


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Powerful Fats Meaning in Hindi – Feature, Type, RDA & Benefits: Podcast

Learn and get the complete information about fats meaning in Hindi language. Here is a Hindi podcast audio for you to know deep about healthy fats. So, check and enjoy the audio.

Fats definition, types, benefits and meaning in HINDI

Fats are the macro-compounds which are made up of glycerol and fatty acids. Listen the audio for more details.

Fats, its types, features, RDA and benefits (HINDI): Health Jaagran

Normally, we think that fats are not good for our health. In fact, we have partial knowledge of the facts. Actually, there must be a balanced form of fats constituents in our body for having sound health. There is a lack of knowledge, so we need to understand basic things about the role of fats in our healthy life.

Prevention is always better than cure. So we need to be alert, be aware of health aspects and make a healthy balance in-between fatty acids so that to prevent yourself for enjoying a healthy lifestyle.


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Why Do We Need Vitamins and Minerals for Good Health: Hindi Podcast

Are you be aware about the need of nutrients in the body. Why do we need vitamins and minerals in our daily routine habits. Know the detailed information in Hindi audio podcast.

Why do we need vitamins and minerals

Given below is the Hindi podcast for you. It is to learn and gather information in Hindi language. Check and learn the information.

Definitions, types, roles, functions and importance of Vitamins and Minerals (HINDI): Health Jaagran

Micro-nutrients

Nutrients which are required in very much smaller qualities. They are smaller as compared to macro-nutrients in the body of an organism.

Types of micro-nutrients

  1. Vitamins (organic compounds): Water-soluble & Fat-soluble vitamins.
  2. Minerals (inorganic compounds): Macro-minerals & Trace minerals.

Vit D3 miracle

Dr. Strand, M.D.

Deep Nutrition

Vitamin D

Mineral and Energy Resources for Our Healthy Life: Trace Minerals

What is micro-nutrient definition, types and its importance. Be aware about vitamins and minerals, mineral and energy resources, their categories and salient features.

Also, here you are going to know about the functions, sources, RDA, deficiencies and excess toxicity effects of some minerals. Those minerals are iron, zinc, iodine, selenium, manganese, copper and fluorine.

Micro-nutrients (Micro means very small)

Nutrients which are required in very much smaller qualities as compared to macro-nutrients in the body of an organism.

Types of micro-nutrients

  1. Vitamins (organic compounds): Water-soluble & Fat-soluble vitamins.
  2. Minerals (inorganic compounds): Macro-minerals & Trace minerals.

A). VITAMINS

Vitamins are micro organic compounds. These are made up by plants and animals, which can be broken down by heat, acid or air.

Categorized into two types: i). Water-soluble & ii). Fat-soluble vitamins.

i). Water-soluble vitamins (Vitamin-B group & C)

ii). Fat-soluble vitamins (Vitamin A, D, E, K)

B). MINERALS

Minerals are inorganic compounds present in soil or water and cannot be broken down.

Categorized into two types: i). Major or Macro-minerals & ii). Trace minerals.

i). Major or Macro-minerals

ii). Trace minerals

Minerals which are required in smaller quantity (mcg, µg or mg) than macro minerals.

Salient features of trace minerals
Iron
  • Iron: (RDA= 17 – 20 mg/day)
    • The amount of iron in our body is too less i.e. only appx 5 gm. But it plays very crucial functions in our body.
    • This is a component of Hemoglobin in the blood.
    • Iron absorption is enhanced with acidic environment.
    • Iron must be consumed in accompany with lemonade or salty chhach or fresh juice.
    • Excessive dietary fiber & consumption of tea or coffee (in any form just after meal) can hamper the absorption of iron.
    • Functions:
      • It helps in oxygen transportation from lungs to various organs and carbon dioxide from the organs to the lungs.
      • Helps in making some hormones.
      • It is present in the muscles in the form of Myoglobin for the storage and use of oxygen.
      • It helps in the formation of ATP for energy utilization in the cells.
      • Supports in detoxification of liver from residue of drugs.
      • It helps in strengthening of immune system.
      • It has a role of co-factor for many enzymes.
      • Plays a role in formation of the neurotransmitters.
    • Sources:
      • Fish, Meat, Egg, Lotus, Spinach, Mustard leaves, Mint leaves, Potato and Onion. Also in Bathua, Banana, Dates, Sesame seed, Coconut, Almond, Apricots, Walnut, Whole grain, Bajra, Pea, Gram etc.
    • Deficiencies:
      • Anaemia, which affects optimal growth, stamina, academic performance, physical activity etc.
    • Excess:
      • It is uncommon. But excessive consumption can lead to liver damage, heart diseases and gastro-intestinal disorders.
Manganese
  • Manganese: (RDA= 4 mg/day)
    • It plays vital role in bone formation, blood clotting and reducing inflammation.
    • It is stored in liver, brain, kidney, pancreas and bones.
    • Functions:
      • Helps in metabolism of carbohydrates, amino acids and cholesterol.
      • It supports bone health and reduce blood sugar.
      • Helps in healing wounds.
      • It helps in forming antioxidant enzymes such as superoxide dismutase (SOD) so that to help in building immune system.
    • Sources:
      • Pine apple, Beans, Sweat potato, Spinach, Green and black teas. Also found in Brown rice, Whole wheat bread, Almonds etc.
    • Deficiencies:
      • Growth retardation.
      • Reduced glucose tolerance.
      • Skeletal or bone abnormalities.
      • Infertility.
    • Excess:
      • Respiratory diseases like acute bronchitis.
      • Muscle spasms in face.
      • Tremors and irritability.
      • Hallucinations.
Copper
  • Copper: (RDA= 900 mcg/day or 1.7 mg/day)
    • It plays a vital role in making RBCs, nerve cells and immunity.
    • It is stored in liver.
    • Most of copper found in liver, kidney, brain, heart and skeletal muscles.
    • Functions:
      • Helps in formation of connective tissues and nervous system functioning (neuron signaling).
      • It helps in absorption of iron and energy production.
      • Helps in cardiovascular functions.
      • It helps in improving immune system and reducing free radicals.
    • Sources:
      • Whole grains, Potato, Beans, Yeast, Green leafy food, Cocoa, Black pepper, Meat etc.
    • Deficiencies:
      • Causes cardiovascular diseases and thyroid problems.
      • Menkes disease/ syndrome (genetic defects, growth failure & nervous deterioration)
      • High risk of osteoporosis.
      • Poor immunity.
      • Deficiency may be cause of high intake of Vit.C and zinc.
    • Excess:
      • Nausea
      • Stomach pain
      • Headache
      • Diarrhea
      • Vomiting
      • Dizziness
      • Heart problems, RBCs abnormalities and Jaundice.
Zinc
  • Zinc: (RDA= 10 – 12 mg/day)
    • It is a component of more than 300 enzymes.
    • Zinc is involved in synthesis and degradation of macro and micro nutrients.
    • It is known for reducing severity & frequency of diarrhea. Also acts for improving symptoms of pneumonia, respiratory infections & cold.
    • Functions:
      • Helps in synthesis of genetic expression.
      • Helps in building immune system and wound healing.
      • It is a part of antioxidant mechanism of our body.
      • Helps in metabolism of protein.
      • Supports in storage, production and release of insulin.
      • Helps in structure formation and functioning of cell membranes.
      • Helps in synthesis of the active form of Vit. A for visual pigments.
    • Sources:
      • Whole grain, Wheat, Gram, Soybeans, Pumpkin seed and Watermelon. Also from Sunflower seed, Milk, Chicken, Fish, Egg, Spinach, Mustard, Bathua, Potato, Banana, Orange etc.
    • Deficiencies:
      • Retardation in growth and maturation
      • Poor immunity
      • Diarrhea
      • Hair loss
      • Reduced appetite
      • Delayed wound healing
    • Excess:
      • Causes copper deficiency and lead to:
        • Vomiting
        • Diarrhea
        • Nausea
        • Cramps
        • Weak immune functions
Iodine
  • Iodine: (RDA= 150 mcg)
    • It is a constituent of the thyroid hormone T4(Thyroxine) and T3(Triiodothyronine). These hormones are critically required for metabolic activities.
    • Functions:
      • Helps in thyroid regulations.
      • It helps in growth, development and functioning of brain.
      • Regulates the speed of oxidation within cells and tissues.
      • It plays important role in metabolism of all nutrients, especially energy.
      • Development of muscle and nervous tissues.
      • Maintain circulatory system.
    • Sources:
      • Iodized salt, Sea salt, Salt water fishes, Sea vegetables, Potato, Spinach, Broccoli, Soybean, Almonds, Oats etc.
    • Deficiencies:
      • Goitre – Enlargement of thyroid gland due to iodine deficiency.
      • Cretinism – Incomplete physical development & mental retardness in infants and young children.
      • Hypothyroidism.
    • Excess:
      • Hyperthyroidism
      • Thyroid cancer
      • Auto-immune thyroid disease
Fluoride or Fluorine
  • Fluoride or Fluorine: (RDA= 1.5 – 2.0 mg/day)
    • It fights bacteria of mouth for the maintenance and safety of teeth.
    • Functions:
      • Helps in bone and teeth health
      • It helps to make the tooth enamel more resistant to the action of acids. These acids are produced by the bacteria present in the mouth.
    • Sources:
      • Fluorinated water, Sea foods, Salt water fishes, Tea and Foods growing in fluorine rich soil (through water, fertilizers etc.).
    • Excess:
      • Dental fluorosis
      • Skeletal fluorosis (stiffness of spine, arthritis, paralysis etc.)
      • Knock knee syndrome.
Selenium
  • Selenium: (RDA= 40 - 55 mcg/day)
    • It is important for cognitive function, immune system and fertility in both men and women.
    • Functions:
      • Helps in reducing the risk of miscarriage.
      • It protects against asthma.
      • Helps in cardiovascular functions.
      • Helps in thyroid regulation and reproduction health. Also, helps in prevention from free radicals.
      • It prevents  HIV from progressing to AIDS.
  • Sources:
    • Egg, Brown rice, Fish, Brazil nuts, Sea food, Meats etc.
    • Deficiencies:
      • Fatigue
      • Poor immunity
      • Brain fog
      • Infertility
    • Excess:
      • A garlic-like smell on the breath and a metallic taste in the mouth.
      • Brittle nails and mottled or decaying teeth.
      • Gastrointestinal problems such as nausea.
      • Neurological abnormalities
      • Fatigue and irritability
      • Skins lesions and rashes
      • Hair loss

Minerals are vital as compared to Vitamins. Lack of vitamins causes diseases but lack of minerals may cause even death.

-healthjaagran

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Nutrients Meaning in Hindi : Healthy Nutrition, पोषक तत्व (न्यूट्रिएंट्स)

Here, we are going to explain the nutrients meaning in Hindi language. You would be enjoy the article. So, keep learning with patience. It would be helpful to every common countryman of India.

पोषक तत्व (Nutrients meaning in Hindi) क्या है ?

भोजन से प्राप्त होने वाले वो रसायनिक पदार्थ (केमिकल सब्सटेंस), जो किसी भी जीव के शरीर के विकास, मरम्मत, रखरखाव और प्रजनन(रिप्रोडक्शन) प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य होते हैं, उन्हें पोषक तत्व कहा जाता है।

पोषक तत्व शरीर को पोषण प्रदान करते हैं और शरीर के विकास और रखरखाव के लिए अति आवश्यक है। पोषक तत्वों के हमारे शरीर में विशिष्ट कार्य हैं और उनके कार्य के अनुसार ही उनकी भिन्न-भिन्न मात्राएं हमारे शरीर को चाहिए होती है।

कृपया ध्यान में रखें कि पोषक तत्व(न्यूट्रिएंट्स) हमारे शरीर के पोषण का स्रोत हैं, जैसे भोजन, जो जीव द्वारा ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। जबकि पोषण विज्ञान(न्यूट्रीशन) एक जैविक क्रिया है, जिसके अंतर्गत भोजन का पाचन करके अवशेष पदार्थो को शरीर से निष्कासित किया जाता है।

अलग-अलग प्रकार के जीवों की, आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरतें अलग-अलग होती हैं।

बड़े पैमाने पर देखा जाए तो पोषक तत्वों को दो वर्गों में बांटा गया है।

पहला, जैविक या अकार्बनिक (ऑर्गेनिक)

दूसरा, अजैविक या अकार्बनिक (इनऑर्गेनिक)

जैविक(ऑर्गेनिक) पोषक तत्वों में ऐसे योगिक(कंपाउंड्स) सम्मिलित होते हैं जिनमें कार्बन शामिल होता है।

अजैविक(इनऑर्गेनिक) पोषक तत्वों में ऐसे योगिक(कंपाउंड्स) सम्मिलित होते हैं जिनमें कार्बन शामिल नहीं होता है।

जानवरों की तुलना में पेड़-पौधों के पोषक तत्वों की जरूरतें बदलती रहती हैं और अलग भी होती हैं, क्योंकि पेड़ पौधे बहुत से पोषक तत्वों को खुद ही निर्मित करते रहते हैं। पेड़ पौधों को लगभग 17 पोषक तत्वों(न्यूट्रिएंट्स) की जरूरत होती है जिनमें से 9 मैक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं (nitrogen (N), phosphorus(P), potassium(K), calcium(Ca), sulfur(S), magnesium(Mg), carbon (C), oxygen(O) and hydrogen(H)) और 8 माइक्रोन्यूट्रिएंट्स होते हैं (iron (Fe), boron (B), chlorine (Cl), manganese (Mn), zinc (Zn), copper (Cu), molybdenum (Mo) and nickel (Ni)).


किसी भी जीव के पोषक तत्वों की आवश्यकता के आधार पर पोषक तत्वों को दो वर्गों में बांटा गया है

मैक्रोन्यूट्रिएंट्स(Macro-nutrients)

पहला, मैक्रोन्यूट्रिएंट्स: इस वर्ग के अंतर्गत वे पोषक तत्व आते हैं, जो जीवों को अधिक मात्रा में चाहिए होते हैं (ग्राम्स या ओंस )

  • इसके अंतर्गत रासायनिक पदार्थ जैसे- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट और पानी आते हैं।
  • इसके अंतर्गत रासायनिक तत्व जैसे कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर और फास्फोरस आते हैं। यह 6 रासायनिक तत्व सभी जीवों के लिए मैक्रोन्यूट्रिएंट्स हैं।
  • माइक्रोन्यूट्रिएंट्स जीवो को विकास और रखरखाव के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं
  • जीवों के शारीरिक निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • कार्बोहाइड्रेट ऐसे पदार्थ हैं जो अलग-अलग प्रकार के शुगर से मिलकर बनते हैं। कार्बोहाइड्रेट को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है पहला, मोनोसैकेराइड्स दूसरा,डाईसैकेराइड्स तीसरा, ओलिगोसैकेराइड्स और चौथा पॉलिसैकेराइड्स।
  • प्रोटीन जैविक पदार्थ हैं, जो अमीनो एसिड्स से मिलकर बने हुए होते हैं और अलग-अलग प्रकार के अमीनो एसिड्स आपस में पेप्टाइड बॉन्ड से जुड़े हुए होते हैं। प्रोटीन भोजन के रूप में लिया जाता है और शरीर में पाचन क्रिया के दौरान प्रोटीएज नामक एंजाइम की सहायता से दोबारा अमीनो एसिड्स में तोड़ा जाता है ताकि अमीनो एसिड्स की अलग-अलग संरचनायें शरीर के विभिन्न हिस्सों में कार्य अनुसार प्रतिक्रिया में सहायक बने।
  • फैट्स या वसा, ग्लिसरीन और फैटी एसिड का मिलाजुला योगिक है, जिसमें कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, एचडीएल, एलडीएल, वीएलडीएल आदि का भी योगदान रहता है।
    • ऊर्जा प्राप्ति: फैट्स (9 किलो कैलोरी पर ग्राम), प्रोटीन (4 किलो कैलोरी पर ग्राम), कार्बोहाइड्रेट्स (4 किलो कैलोरी पर ग्राम)। शरीर के कार्यों को करने के लिए जिस ऊर्जा की आवश्यकता शरीर को होती है वह ऊर्जा सबसे पहले कार्बोहाइड्रेट्स से, फिर फैक्ट्स से और अंत में प्रोटीन से ली जाता है।

माइक्रोन्यूट्रिएंट्स(Micro-nutrients)

दूसरा, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स: इस वर्ग के अंतर्गत वे पोषक तत्व आते हैं, जो जीवों द्वारा मैक्रोन्यूट्रिएंट्स की तुलना में कम मात्रा में चाहिए होते हैं (मिलीग्राम या माइक्रोग्राम )

  • इस वर्ग में विटामिन और मिनरल सम्मिलित हैं।
  • कोशिकाओं के जैव-रासायनिक और शारीरिक कार्यों के लिए अनिवार्य हैं।
  • शरीर को बैक्टीरिया, वायरस आदि से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
  • मिनरल्स एसे तत्व हैं, जो चयापचय(मेटाबोलिक) क्रियाओं के लिए अति आवश्यक होते हैं।
  • विटामिंस एसे जैविक पदार्थ हैं, जो हमारे शरीर के लिए अति आवश्यक हैं और भिन्न भिन्न प्रकार के प्रोटींस के लिए को-फैक्टर या को-एंजाइम की तरह काम करते हैं तथा मेटाबोलिक नियंत्रक और एंटीऑक्सीडेंट्स की भूमिका भी निभाते हैं।
  • विटामिन्स की कमी से बीमारी होती है। लेकिन मिनरल्स की कमी से मौत भी हो सकती है, क्योंकि हमारे अंग प्रणाली में, मिनरल्स के बहुत ही अहम् कार्य होते हैं, जैसे- आयरन की कमी से शरीर में हिमोग्लोबिन का कम होना, कैल्शियम की कमी से हार्ट अटैक होने की संभावना आदि।

आवश्यक पोषक तत्व(एसेंशियल न्यूट्रिएंट्स)

ऐसे पोषक तत्व जो किसी जीव द्वारा उसकी शारीरिक और जैव रासायनिक क्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं। लेकिन उन पोषक तत्वों का जीव के शरीर में या तो अभाव होता है या फिर जीव के शरीर में बनते ही नहीं है। साधारण भाषा में हम यह कह सकते हैं कि जीव को उन पोषक तत्व को भोजन के रूप में बाहर से लेना होता है।

  • भोजन से ही लेना होता है।
  • मेटाबोलिक क्रियाओं के लिए अति आवश्यक पोषक तत्व होते हैं।
  • आवश्यक पोषक तत्वों की सूची: 9 अमीनो एसिड्स (phenylalanine, valine, threonine, tryptophan, methionine, leucine, isoleucine, lysine, and histidine), 2 फैटी एसिड्स (alpha-linolenic acid (an omega-3 fatty acid) and linoleic acid (an omega-6 fatty acid)), 13 विटामिंस (vitamins A, C, D, E(tocopherols and tocotrienols), K, thiamine (B1), riboflavin (B2), niacin (B3), pantothenic acid (B5), pyridoxine (B6), biotin (B7), folate (B9), and cobalamin (B12), 15 मिनरल्स (potassium, chloride, sodium, calcium, phosphorus, magnesium, iron, zinc, manganese, copper, iodine, chromium, molybdenum, selenium and cobalt (component of vitamin B12).
  • उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए, हमें इन पोषक तत्वों को अच्छे भोजन के साथ साथ खाद्य सप्लीमेंट्स के रूप में भी अलग से लेना होता है।

अनावश्यक या गैर जरूरी पोषक तत्व

ऐसे पोषक तत्व जो किसी भी जीव के शारीरिक और जैव रासायनिक क्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं। लेकिन उन्हें बाहर से लेने की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि वे पोषक तत्व जीव के शरीर में स्वतः ही निर्मित होते रहते हैं एवं बाहरी स्रोत या शरीर में उनकी उचित मात्रा उपलब्ध होती है।

  • शरीर में खुद ही बनते रहते हैं।
  • खाद्य सप्लीमेंट्स के रूप में लेने की आवश्यकता नहीं है।

फाइटोन्यूट्रिएंट्स या प्लांट न्यूट्रिएंट्स

पेड़ पौधों से प्राप्त होने वाले मुख्य पोषक तत्वों को फाइटोन्यूट्रिएंट्स या प्लांट बेस्ड न्यूट्रिएंट्स कहा जाता है। ये पोषक तत्व पौधों से प्राप्त होने वाले रासायनिक तत्वों के रूप में जाने जाते हैं जिनमें पौधों से प्राप्त होने वाले पोषक और ग़ैर-पोषक तत्व दोनों ही सम्मिलित होते हैं। जैसे पॉलिफिनॉल्स, फ्लेवोनॉयड्स, रेसवेराट्रॉल और लिगनेंस आदि।

Phyto-nutrients are plant based compounds which are rich in antioxidants and are key ingredients to help neutralize free radical damages.

Combination of vitamins and minerals with phyto-nutrients induces high potential effect of nutrients for empowering immune system of an organism.
  • इनमें शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव होते हैं। हम देखते हैं कि पेड़ पौधों का जीवन लंबा और शानदार होता है।
  • ये पोषक तत्व पेड़-पौधों के रंग और छिलके से प्राप्त होते हैं।
  • अभी भी इन तत्वों की खोजबीन जारी है कि, ये जीवों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में कितने समर्थ हैं।

“Nutrients are lifeline of our healthy and wealthy lifestyle” – healthjaagran

Nutrients meaning in English.

You might have learnt so much things about nutrients meaning in Hindi. This article would be helpful to you. So, please feel free to share your feelings with us to grow more in life. Normally, it is tough to find exact nutrients meaning in Hindi language. But, here you found lots of information about different types of nutrients in Hindi version.